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कभी - कभी का लिखना

बारह बजकर बीस मिनट हो रहे हैं, और आप कहें तो सेकंड्स भी बता दूं। समय के व्यर्थ होने का दुख मुझे सबसे अधिक चुभता है पर विकर्षण की इस दुनियां मैं सबसे ज्यादा मूल्य किसी का गिरा है तो वो समय का ही है। हिंदी मैं कहूं तो हमारी जिंदगी मैं डिस्ट्रैक्शन इतना है कि एक हल्का सा नोटिफिकेशन हमारे दिन का बड़ा हिस्सा खा जाता है, और दिन के अंत मैं हमने कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसे समय के सदुपयोग मैं गिनाया जा सके, क्या मिल गया अगर मेरी फोटो दस पंद्रह लोगों ने देखली तो? अगर मुझे न पता हो आजकल की इंटरनेट की नई वाइरल सेंसेशन कौन है तो कौनसा मेरी जिंदगी के अहम काम रुक जाएंगे? पर अगर मैं थोड़ा सा अनुशासित होकर उस समय को प्रयास, अभ्यास और कर्म से जड़ देता तो शायद एक बड़े अहम काम को अपने जीवन में साध सकता था। ऊपर इंटरनेट को लेकर ज्ञान इसलिए दिया है कि मुझे पूरा एक महीना होने वाला है अपने गांव से २३०० किलोमीटर दूर रहते हुए, एक ऐसी जगह जहां मुझे कोई नहीं जानता, जहां मैं किसी को नहीं जानता। जहां चारों तरफ हरियाली है जहां रोज सुबह चिड़ियों की आवाज मेरे कानों में रस घोलती है, जहां शांति है, जहां ताजगी है और जहां ...