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मैं निकलूंगा घर से तनिक छांव तो होने दो।

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To watch this on Youtube please click here. मैं निकलूंगा घर से तनिक छांव तो होने दो। छालों से परेशान मेरे पांव तो संभलने दो। मैं हर सवाल का वाजिब जवाब दूंगा, पहले मुझे मेरे जवाब तो मिलने दो। यूं ही ताने न दिया करो मुझे कुछ हासिल न करने पे, मैं बहुत कुछ करूंगा मुझे कुछ करने तो दो। बंदिशें भी तुम्हारी दी हुई हैं, बातें भी तुम बनाते हो। मेरी हर शिकस्त पे जश्न भी तुम मनाते हो। हर कतरा मेरे जिस्म का शोर मचाएगा मेरी फतह का, फिलहाल मेरे मन की आवाज़ मुझे सुनने तो दो। हर जंजीर को मेहनत की शमशीर से तोड़ूंगा मैं। इंतजार करो मेरी चिंगारी में हवा लगने तक का, फिर आग से मेरी तुम अपनी जलन को जलने दो। उड़ान भरूंगा बहुत ऊंची ऊंची फिर भी चाहता हूं कि मुझको जमीं से जुड़ा रहने दो, जला जाता हूं खुद अपने ही आप में, चला जाता हूं कुछ पाने की आस में। हर वक़्त यूं सताया ना करो, कि सब कुछ पाना ही नहीं होता। कुछ मिला तो तुमको खबर हो ही जाएगी, फिलहाल मुझे चलने का मजा तो लेने दो। मैं ऐसा, मैं वैसा, मैं कैसा ये खबरें तुम्हें सब पता हैं, मेरे शौक मेरे तरीके से सब खफा हैं, तु...

मुझको आदत नहीं है।

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Watch this poem on Youtube recited by me. बड़ा फिक्र करते हो हालातों के नाजुक होने का, इमारतें तबाह होते देखी हैं पानी के जलजलों से। यूं हल्की हल्की बूंदों से रुकने की मुझको आदत नहीं है। सुनाते तो हो मुझे हर रोज किस्से अपनी मजबूरियों के, यूं खुद के गम गुनगुनाने की मुझको आदत नहीं है। बहुत खफा रहते हो हमसे हर वक़्त शिकायत रहती है मान भी जाओ की मुझे किसी को मनाने की आदत नहीं है। ढूंढ तो रहे हो तुम कुछ अपने लिए मुझमें, मैं किसी काम न आऊंगा, मेरे टूटे हुए होने का कोई गवाह नहीं है। बहुत उम्मीदें न बांध लेना मुझसे, कि गिरते पड़ते पहुंचा हूं यहां, यूं ठहरने की मुझको आदत नहीं है। क्या धमकाते हो मुझे हर वक्त बर्बाद करने को, जाओ भी ऐसी भी मेरी कोई तिजारत नहीं है। सुना है शोहरत की बहुत चाह रखते हो तुम, दो वक़्त पेट भरने के बाद मुझको और कमाने की आदत नहीं है अब निकला ही हूं तो कुछ हासिल करके ही फिरूंगा, यूं भीड बने रहने की मुझको ख्वाहिश नहीं है। उम्मीद है कि बुझती नहीं मेरी,और शाम ढलते ही घर लौट आने की मुझको आदत नहीं है