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Showing posts from February, 2021

हर दम परेशान

 तीन बजकर सोलह मिनट पर लिखना शुरू कर रहा हूं। नींद ने मेरे दरवाजे पर आना छोड़ दिया है, मिथ्याभिमान सामाजिक कर्क रोग जैसा है। आपको लगता है आप बड़े ही अच्छे व्यक्ति हैं, आपका दिल तो दूसरों की सहायता को ही फड़फड़ाता रहता है, आप को तो जिंदगी के वो अनुभव हो रहे हैं जिनकी पहुंच से शायद आम आदमी तो मीलों दूर होगा, आप खुद को इतना महान समझने लगते हैं कि खुद की सुविधाओं के लिए आप अपनी नाक के नीचे बह रहे किसी के खून का इशारा भी नहीं पाते। अपराधी होते हुए भी जब हम खुद को पीड़ित समझने लगें क्यूंकि आपके पास तो एक दिल है जो हमेशा दूसरों के लिए धड़कता है, आपको तो पूरी मानवता की चिंता है, जब व्यक्ति ज्ञान की खोज करते करते विमूढ़ हो जाता है तो इस प्रकार की घटनाएं शायद उसके आम जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। समझने लायक भाषा में कहूं तो आदमी चतुर बनते बनते चूतिया बन जाता है तो उसे लगने लगता है कि वही पीड़ित है, उसके साथ हुआ गलत गलत है उसने किन परिधियों को लांघकर किसको किस आग में झोंक दिया उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। समय के नियम ही ऐसे नखरिले हैं कि केवल मुर्दा ही एक समान रह सकता है, अंग्रेजी की एक कहाव...

एक बार फिर अंधेरा लुभा रहा है।

 ग्यारह बजे काम से लौटा था आज, कंपनी के कैफेटेरिया में मैं खाना नहीं खा पाता क्यूंकि केरल के लोग मांसाहारी हैं और मैं बचपन में राधे राधे की धुन पर ताली बजाकर खिलाया हुआ बच्चा। मुझे मांसाहारियों से कोई भी शिकायत नहीं पर किसी के रक्त, हड्डियों और प्राण को जो भूख खा जाए वो मुझे किसी राक्षस की परछाईं से कम नहीं लगती। भूख तेज लग रही थी और खाना बनाने का मन मेरा था नहीं, इसलिए पुलाव ऑर्डर कर लिया उसके बाद थोड़ी देर छत पर टहल कदमी की फिर अब अपने कमरे की खिड़की के सहारे झिंगुरों की आती आवाज से शब्दों के सुरों का अभ्यास करने बैठ गया हूं। कभी - कभी मैं खुद को बहुत सुलझा हुआ देखता हूं मानो कुछ महत्वकांक्षा ही ना हो जो भी हो रहा है राम कृपा से हो रहा है और जो भी होगा राम कृपा से होगा। मेरी दशा ठीक शीतनिद्रा में गए मेंढ़क जैसी होती है। कभी कोई अजीब सी इच्छा कुछ कर दिखाने की, वास्तविक दुनियां को किनारे कर वस्तुविक दुनियां के नर और नारी रूपी जानवरों पर अपना प्रभाव जमाने की, मैं तुमसे बेहतर हूं बताने की होने लगती है। ये अहंकार, मोह और महत्वाांक्षाएं मुझे बार बार घेरने लगती हैं। हर किसी के ज...