" बाय दादा "
" बाय दादा " यूं तो हर व्यक्ति सुविधा अनुसार रेल गाड़ी का टाइम टेबल और अपने आने जाने का समय निश्चित करके घर से निकलता है, परन्तु भारत में एक वर्ग ऐसा भी है जो आवश्यकता के अनुसार कभी भी स्टेशन पर पहुंच कर स्टेशन पे ही यह पता करता है कि कौनसी गाड़ी कहां जाएगी और जो गाड़ी उस स्थान को जा रही है जहां उसे जाना है लपक कर उसकी जनरल बोगी में बैठ जाता है। इस वर्ग के लिए ट्रेन का टिकट लेना उतना ही जरूरी है जितना उत्तर प्रदेश में बारहवीं करने के बाद स्नातक करना, होता कुछ नहीं पर फिर भी कर लेते हैं ताकि विवाह कार्य संपन्न हो जाए। यूं तो जनरल बोगी को लोग दूर से देखकर भी पसीने छोड़ने लगते हैं पर कुछ लोगों के लिए ये वरदान का काम करती है, चूंकि टिकट कलेक्टर में इतनी जान नहीं होती कि वो इस डब्बे की भीड़ को चीरकर अंदर घुस जाए इसलिए टिकट न खरीद पाने वाले लोगों को इससे बहुत राहत मिलती है। दफ्...