Posts

Showing posts from December, 2019

" बाय दादा "

                                                       "  बाय दादा " यूं तो हर व्यक्ति सुविधा अनुसार रेल गाड़ी का टाइम टेबल और अपने आने जाने का समय निश्चित करके घर से निकलता है, परन्तु भारत में एक वर्ग ऐसा भी है जो आवश्यकता के अनुसार कभी भी स्टेशन पर पहुंच कर स्टेशन पे ही यह पता करता है कि कौनसी गाड़ी कहां जाएगी और जो गाड़ी उस स्थान को जा रही है जहां उसे जाना है लपक कर उसकी जनरल बोगी में बैठ जाता है। इस वर्ग के लिए ट्रेन का टिकट लेना उतना ही जरूरी है जितना उत्तर प्रदेश में बारहवीं करने के बाद स्नातक करना, होता कुछ नहीं पर फिर भी कर लेते हैं ताकि विवाह कार्य संपन्न हो जाए। यूं तो जनरल बोगी को लोग दूर से देखकर भी पसीने छोड़ने लगते हैं पर कुछ लोगों के लिए ये वरदान का काम करती है, चूंकि टिकट कलेक्टर में इतनी जान नहीं होती कि वो इस डब्बे की भीड़ को चीरकर अंदर घुस जाए इसलिए टिकट न खरीद पाने वाले लोगों को इससे बहुत राहत मिलती है। दफ्...

भीष्म प्रतिज्ञा

                                                       भीष्म प्रतिज्ञा                                                                             रास्ते जो वीरान हैं, फासले जो अनजान हैं, गुम खामोशियां और अंधेरे ये गुम नाम हैं। अपने दिल से आती आवाजों को सुनना है, दौड़ती इस दुनियां में रुकना मना है। क्या हश्र होगा, क्या अंजाम होगा, क्या इंतेज़ाम होगा, रिवायत है यहां तू कुछ नया कर तेरे सर पे हर इल्जाम होगा। संघर्षों से सीख तू, मांग ना दया की भीख तू, हर गलती पे ज्ञान मिलेगा, ले नई सीख तू। भूल में क्षमा बन, पापों में प्रायश्चित बन, ढलती शाम का दीपक बन, बुझती सांस का जीवन बन। नारायण भी मौन तोड़े ऐसी भीष्म प्रतिज्ञा बन। परिणाम में प्रशंसक...

शहर गांव की नजर से।

To watch this poem recited in a video by me please  click www.youtube.com/c/praveenthakur खुली हवा में घूमता था, जन्नत सा नजारा था, जब पहली बारिश की खुशबू सूंघता था। आ गया हूं कमाने इस शहर में, कुछ रोज में लगता है  हो गए जमाने इस शहर में। हवा कितनी साफ थी ये कोयल गाके बताती थी, खुशी के इजहार में पंक्षि पंख फड़फड़ाते थे, लाश लिए खड़े हैं दरख़्त राहों में अपनी अपनी, हवा भी जहर है तेरे शहर में। हवाई जहाज तो बहुत उड़ते हैं पर चिड़िया गुम है तेरे शहर में। हर शक्श नाम से जानता था, कहीं न कहीं से कोई रिश्ता मानता था, हर आदमी अज नबी सा क्यूं है इस शहर में, इल्म तो है पर तहजीब गुम है तेरे शहर में। जिस रोज घर रोटी अच्छी न लगती थी किसी भी घर चला जाऊं मेरी भी थाली लगती थी रोटियां कम थीं पर कोई भूखा न सोता था हर शक्श रोता सा क्यूं है इस शहर में कहीं रोटियां फिकती हैं कही लोग भूखे सोते हैं तेरे शहर में। ठंड जब लगती थी गांव के चौक में आग जलती थी बैठता था तजुर्बा वहां तजुर्बे की तालीम मिलती थी लिखा पड़ा कम था मेरा गांव पर हर बुजुर्ग को इज्जत मिलती...

Short poetry for WhatsApp status by Praveen Thakur

To watch poetry videos please subscribe to my YouTube channel  Click here मेरी जमीं मेरा अम्बर, क्या पैगम्बर भी बांट लोगे तुम। हर बार उलझन में आकर लौट आता हूं, क्या बिना मेरी बारी आये ही मेरा नंबर काट दोगे तुम? अजीब सा मसलसल मसला है तरन्नम ए हयात का। दिल, जिगर और धड़कन हर जगह कब्जा है आपका, हवाओं को भी रास आने दीजिए हुज़ूर, अब क्या सांसें भी थाम दोगे तुम? ~प्रवीन ठाकुर Apne apko roj tarasha jis safer e anjam ki aivaj me, Uske ane ki ahat see hi tut Gaya me ~Praveen Thakur Hawa ki lahar bankar tu Meri khidki na khatkhata, Me band kamre me toofan samete baitha hun ~Praveen Thakur वो बेरहम नींद उड़ाके कहता है आराम फरमाइए ख्वाबों में दीदार होगा ~ प्रवीन ठाकुर Usko mangna tha mujhe me qafir tha Sajda n karta to Kya karta. ~Praveen Thakur मेरी उम्र और मेरी हरकतों में फ़र्क है थोड़ा, जहां तुम अनमने से होकर हार जाते हो, उसी तरफ दौड़ जाता हूं मैं। ख़ामोश रहकर भी बहुत कुछ बोल जाता हूं मैं ~ प्रवीन ठाकुर किसी रोज ख्वाब देखा था तेरा कि तू मेर...

#justiceforpriyankareddy #justiceforeverywomen

Click here to watch this on YouTube वो कुत्ते जिन के सर पे मौज सवार है, या वो पुलिस जिसका गुंडों से करार है, या वो नेता जो देश या विदेश में फरार है। रात को जल गया मेरा हिंदुस्तान जिंदा बताओ कौन जिम्मेदार है । बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ये कहते हो। शर्म करो कुछ। या देवी सर्व भूतेशु शांति रूपेण संस्थिता कहने वालों, नारी की लाज पर कौरवों का सर्वनाश, रावण का शीश भेदने वालों, मोमबत्ती लिए खड़े हो, मोमबत्ती लिए खड़े हो, राम बाण कहां है तुम्हारा जय श्री राम कहने वालों। इधर टाल कर उधार डाल कर मजहब की सौल डाल कर निकल न जाना पतली गली से निर्भया की तरह शर्म पर पर्दा डाल कर। इन सियासतदानों से नहीं होगा तुम खुद इसका इलाज करो छोड़ जो दिया गर हैवानों को जिंदा अपनी बहन का ख्याल करो। रख लो राम बाण तुनीर में, सुदर्शन चक्र फिर धारण करो, समस्या जटिल है भारत की सीता और द्रोपदी की अब इस का निवारण करो। मोमबत्तियां बहुत जला लीं इस बार जला डालो इन राक्षसों को हे भारत के राम अब अग्नि रूप धारण करो।