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Showing posts from March, 2021

मेरी प्रेमिका कहां है?

 रात के ढाई बज गए अब तो शायद सारी उम्मीदें भी किसी एक नई उम्मीद के जागने की उम्मीद में सो चुकी हैं। जिंदगी कहां से बह रही है और कहां रुकेगी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, हर चीज से मुंह फेर लेने की जैसे आदत सी हो गई है। इंस्टेंट दुनियां में जैसे फिट नहीं बैठ पा रहा हूं, कभी कभी लगता है इस अकेलेपन से निजात पाने के लिए किसी बंधन में बंध लूं। पर इस बुलेट ट्रेन से तेज भागती दुनियां में श्रीकांत की प्यारी कहां इंतजार करेगी, या फिर विनय सिंह की सोफिया जो प्रेम के परम होने को समझे। फूहड़ता के जमाने में मैं गजलों और गांव के तरानों का स्वाद लेता हूं, वन नाइट स्टैंड और ब्लाइंड डेट के जमाने में मुंशी जी और सरथ बाबू जी के उपन्यासों की प्रेमिका खोजता ये मेरा मन दो समय के अंतरालों में फंसकर रह गया है। जब भी जीवन में कुछ अच्छा होने लगता है तो अंदर बैठे कहानीकार को लगता है कि उसकी मृत्यु के दिन निकट आ गए इसलिए सारी खुशियां अपनी बर्बाद कर लेता हूं। पर इस सोसल मीडिया की दुनियां में सालों का सफर तय करके बनी एक कहानी को पढ़ने का समय किसके पास है? 4 साल से श्री लेखा से रोज मिन्नतें करता हूं, पर श्र...

पापा.. बस एक संदेश आपके लिए।

 पापा ....... आपको ये बताने की जरूरत नहीं है कि आपका बेटा अब किस काबिल है या कितना नाकाबिल मुझे लगता है मैंने आपको छाती चौड़ी करने के कई मौके दे दिए हैं.... लेकिन आज वो बातें साफ करना चाहता हूं जो शायद मेरी और आपके बीच की इस शर्मिंदगी को खत्म कर के मुझे जीने दे... अब मैं आपको या किसी और को अपनी काबिलियत दिखाना नहीं बस खुद जीना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि आपने हमेशा ही मेरी फिक्र की मेरे लिए परेशान रहे पर पापा आप जानते हैं कि नए जमाने में लड़के लड़कियों के लिए कुछ एफर्ट्स न करें तो लड़कियां पिछवाड़े पे लात मारके भाग जाती हैं.. ये बात बताकर मैं बाप और बेटे के रिश्ते को इधर से उधर करके नहीं समझा रहा बस आपको ये खबर दे रहा हूं की जितना आपको लगता होगा आपने गांव से दुनियां देखी है उससे कहीं ज्यादा चालू, होशियार और किसी को भी बेच खाने वाले हैवान लोगों के साथ मैं व्यवहार कर उन्हें चुटिया कहके आ चुका हूं और जब छपरी टाइप लड़कियां बिना एफर्ट्स के इज्जत नहीं दे पातीं तो आप ने तो कभी जाहिर भी नहीं किया कि आपको मेरी फिक्र है.. आज उम्र के उस पड़ाव पर हूं जहां लाखों लोगों ने मुझे जाना था बड़े स...

एक आखिरी सलाह, प्यार में पड़ने से पहले।।

 तुझे बेहतर कोई मिलने से बेहतर था तेरा बेहतर हो जाना, तुझे पाने को हर कोई कहेगा कि तू जैसा है कोई तुझे वैसा ही चाहेगा। चाहेगा जरूर मगर वो गुरूर कहां से लाओगे जो तुम पर इश्क दया बनकर नहीं अभिमान बनकर बरसे, किसान जो लटके रहते हैं पेड़ों पर कीमत नहीं जानते खुद के पैदा किए अन्न की, लुट जाते हैं व्यापारियों के बाजार में भोलेपन में, तुम खुद को जानते नहीं दूसरों को जानने चले हो?   तेरे भोलेपन से प्यार हर कोई कर बैठेगा, लेकिन क्या तेरा आशिक भी भोला है? इस दुनियां में दिमाग से खेलने वालों का तुझे कोई हिसाब न होगा शायद अक्सर खरीदार के मन के भाव में खरीद लिए जाते हैं जो खुद की कीमत नहीं जानते, जिन्हें खुद पर विश्वास नहीं होता। जिनके अंदर चिंगारी नहीं होती, जो खुद अपने आंसू पोंछना सीखने के बजाय किसी और को खुद को तोहफे में दे देते हैं कि उसने तकलीफ में कंधा दिया था। सौदेबाजियों से भरी है दुनियां तूने अभी नहीं देखी तो इश्क मत कर, परिंदों को पिंजरा रास नहीं आता फिर करम फोड़ने के अलावा क्या कर लेगा जो आजादी न मिली? जो कुछ देर की खुशी के लिए तूने सात जन्मों के रिश्ते बनाने की कोशिश की घुट...