समय से मार खाया इतिहास
अंधकार के पीछे मोमबत्ती लेकर चलता हुआ मनुष्य समझता है कि संसार को राह दिखाने का ठेकेदार वही है, उसके पीछे चल रही भीड़ उसके निर्देशों पर चलेगी, और काट देगी समय की तारीखों के गले, ऐसी गलतफहमियां पालकर मानव जाति को तंग करता हुआ व्यक्ति एक दिन हदें पार कर देता है, सारी मानवीय करुणाओं को ताक पर रखकर उजाड़ना शुरू कर देता है बने बनाए और सजे सजाए घरों को। पर वो भूल जाता है कि समय का एक सूर्य भी है, जिसकी रोशनी चीर देती है उस राह भटके हुए व्यक्ति को जो अपना महत्व आवश्यकता से अधिक समझ लेता है। आज बात करेंगे उन तुच्छ इतिहासकारों की जिन्होंने अपने आप को सास्वत समझने की भूल करी पर खुशनसीब हैं ये इतिहासकार कि इनके जीवित रहते ही इनकी गढ़ी गई गाढ़ी गंध मारती इतिहास की सड़ी- सड़ाई शिक्षा अब इनके मुंह पर ही चुपड़ी जा रही है। दरअसल इतिहास एक ऐसा शब्द है जिससे छेड़छाड़ मनुष्य ने कई बार करने की कोशिश करी, जाने कितने इतिहास धरती में गढ़े हुए मिले, इतिहास तो जमीन खोदकर फिर से वट का विशाल वृक्ष बनकर निकल आता है, पर मर जाते हैं उस इतिहास को छुपाकर दुनियां जितने की कोशिश करने वाले लालची और अहंकारी लोग...