मैं निकलूंगा घर से तनिक छांव तो होने दो।














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मैं निकलूंगा घर से तनिक छांव तो होने दो।
छालों से परेशान मेरे पांव तो संभलने दो।

मैं हर सवाल का वाजिब जवाब दूंगा,
पहले मुझे मेरे जवाब तो मिलने दो।
यूं ही ताने न दिया करो मुझे कुछ हासिल न करने पे,
मैं बहुत कुछ करूंगा मुझे कुछ करने तो दो।

बंदिशें भी तुम्हारी दी हुई हैं,
बातें भी तुम बनाते हो।
मेरी हर शिकस्त पे जश्न भी तुम मनाते हो।
हर कतरा मेरे जिस्म का शोर मचाएगा मेरी फतह का,
फिलहाल मेरे मन की आवाज़ मुझे सुनने तो दो।

हर जंजीर को मेहनत की शमशीर से तोड़ूंगा मैं।
इंतजार करो मेरी चिंगारी में हवा लगने तक का,
फिर आग से मेरी तुम अपनी जलन को जलने दो।
उड़ान भरूंगा बहुत ऊंची ऊंची फिर भी चाहता हूं कि मुझको जमीं से जुड़ा रहने दो,

जला जाता हूं खुद अपने ही आप में,
चला जाता हूं कुछ पाने की आस में।
हर वक़्त यूं सताया ना करो, कि सब कुछ पाना ही नहीं होता।
कुछ मिला तो तुमको खबर हो ही जाएगी, फिलहाल मुझे चलने का मजा तो लेने दो।

मैं ऐसा, मैं वैसा, मैं कैसा ये खबरें तुम्हें सब पता हैं,
मेरे शौक मेरे तरीके से सब खफा हैं,
तुम खुद के सपने देखो न, क्यूं नहीं भूल जाते मेरी खताएं।
तुम खुद अपनी राह चल कर तो देखो।

मैं निकलूंगा घर से तनिक छांव तो होने दो।
छालों से परेशान मेरे पांव तो संभलने दो।


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