पापा.. बस एक संदेश आपके लिए।
पापा ....... आपको ये बताने की जरूरत नहीं है कि आपका बेटा अब किस काबिल है या कितना नाकाबिल मुझे लगता है मैंने आपको छाती चौड़ी करने के कई मौके दे दिए हैं.... लेकिन आज वो बातें साफ करना चाहता हूं जो शायद मेरी और आपके बीच की इस शर्मिंदगी को खत्म कर के मुझे जीने दे... अब मैं आपको या किसी और को अपनी काबिलियत दिखाना नहीं बस खुद जीना चाहता हूं।
मैं जानता हूं कि आपने हमेशा ही मेरी फिक्र की मेरे लिए परेशान रहे पर पापा आप जानते हैं कि नए जमाने में लड़के लड़कियों के लिए कुछ एफर्ट्स न करें तो लड़कियां पिछवाड़े पे लात मारके भाग जाती हैं.. ये बात बताकर मैं बाप और बेटे के रिश्ते को इधर से उधर करके नहीं समझा रहा बस आपको ये खबर दे रहा हूं की जितना आपको लगता होगा आपने गांव से दुनियां देखी है उससे कहीं ज्यादा चालू, होशियार और किसी को भी बेच खाने वाले हैवान लोगों के साथ मैं व्यवहार कर उन्हें चुटिया कहके आ चुका हूं और जब छपरी टाइप लड़कियां बिना एफर्ट्स के इज्जत नहीं दे पातीं तो आप ने तो कभी जाहिर भी नहीं किया कि आपको मेरी फिक्र है..
आज उम्र के उस पड़ाव पर हूं जहां लाखों लोगों ने मुझे जाना था बड़े से बड़े नेताओं से बैठक में शबाशियां ठुकवाई हैं और लड़कियों से लेकर नशे और कर्जे मैं भी रहा हूं यानी कि अब मैं आदमी कहने लायक हूं दुनियां की नजरों में... शायद यही डिस्क्रेप्शन है।
और आज शायद मैं ये भी समझ गया हूं कि मेरी मां के बाद आपकी जिंदगी में और औरतों का आना कोई बुरी बात नहीं थी ये बस मेरी जिंदगी ही नहीं आपकी जिंदगी भी थी पर जिसमें आपने अपनी जिंदगी तक ही सोचा।
आज मैं मानता हूं कि आनंद आपकी जिंदगी मैं भी होना चाहिए था पर उस आनंद मैं आप मेरी परवरिश करना भूल गए, आपको क्या लगता है महीनों - महीनों तक मैं आपका फोन नहीं उठाता तो ऐसा क्यों होगा? आपसे कभी बस दस किलोमीटर दूर रहकर भूखा सो जाया करता था फिर भी आपको कॉल नहीं किया आखिर इतनी नफरत या अभिमान मुझमें आया कहां से जब आप मेरी फिक्र करते थे?
पता है पापा सच कहूं तो मैं कुछ नहीं समझ पाता जब भी आपके बारे मैं सोचता हूं, न अपनी कहानी के आप मुझे विलन लगते हो न हीरो पता नहीं क्यों अजीब सी घुटन है आपको लेकर, जब आपका अपनी जिंदगी जीने का टाइम था आपकी जवानी थी और आपके सपने, पापा प्लीज किसी बात से शर्मिंदा मत होना अब तो कम से कम आपको इन बातों को मानना पड़ेगा क्योंकि अब आप के बेटे की भी जवानी है और वो ये जानता है कि इस समय उसकी आपसे ज्यादा जरूरत किसी को नहीं, पर फिर भी वो आपका मरने पर भी मुंह नहीं देखना चाहता बस आपकी तरह कुढ़ कुढ़ कर जीता है कि काश वो आपके पास आकर आपके लिए समाज की सारी प्रथाओं को स्वीकार कर आपकी पसंद की हुई किसी ठाकुरानी से शादी कर आपकी समाज में इज्जत बढ़ा दे, पर ऐसा कभी नहीं होगा...जब आपने मुझे बस मेरे भरोसे छोड़ दिया तो मेरे पास दो विकल्प थे.. एक ये जो हिंदुस्तान के हर अनाथ का होता है किसी चाय की टपरी के बर्तन धोना या किसी की पॉकेट मारना या फिर हिंदी फिल्मों के चुटियापे की तरह घर से भागना और भागते भागते तब रुकना जब तक कोई पुलिस वाला या कोई तीस मार खान बनकर भागने न लगूं। पर आपको यहां तक तो हंसी आही गई होगी क्योंकि मैं भागा गांव के गोबर से निकलकर ठाकुर के लड़के ने शहर के चमार के ऑफिस मैं झाड़ू लगाया और भागा धोखे धडी की पर वैसे अपराध वाली नहीं बस अपनी उम्र 13 से 18 कर ली नौकरी लेने के लिए और नौकरी करी फिर और भागा वर्ल्ड क्लास नौकरी अपने लिखने के पैशन के लिए छोड़ दी और कविता समारोह में तालियां बटोरीं उसके बाद भी भागा और तब जब लगने लगा कि काफी दूर आ गया काफी नाम कमा लिया तो धड़ाम से गिर गया औंधे मुंह इतना दूर भाग कर कहां पहुंचा और कुछ साल भी उस ऊंचाई का आनंद नहीं ले पाया।
पापा तब मुझे एहसाह हुआ कि मुझे उस सफलता पर शाबास कहने वाला भी कोई नहीं था, अकेले पन ने खोखला कर दिया था मुझे और फिर थोथा चना कितनी देर बजता।
जितना मैं भागा जितना रोया उस सब उछल कूद में अच्छे बुरे का फर्क सीखने में खुद की परवरिश खुद करने मैं फिर वही गांव के ठाकुर का लड़का नहीं रहा, मेरा घमंड, अभिमान सैकड़ों बार टूटा और जिंदगी को मैंने उन नजरों से नहीं देखा जिनसे आप देखे थे या जिस तरीके के रहन सहन से मुझे भी रहने पर आपकी नाक नहीं कटती।
पापा.. मैं अच्छे से जानता हूं आपने मेरे भले के लिए भी सोचकर दूसरी शादी की होगी कि मुझे कोई मां का प्यार मिले, या आपने मेरे भले के लिए ही मुझे हॉस्टल भेजा होगा, मैं बुआ के साथ आपसे दूर रहा शायद आपको लगा होगा मैं वहां खुश रहा, लेकिन आपकी मेरी फिक्र मैं की गई हर कोशिश मुझे आपसे ही दूर करती गई जब भी किन्हीं मुसीबतों में फंसा बस यही बोला मेरा बाप ऐसा न करता तो शायद मैं ऐसा नहीं होता, मेरे सारे फेलियर्स के बिल मैं ईजीली आपके सर फोड़ता रहा और बस धीरे धीरे आप मेरी सबसे बड़ी कमजोरी बन गए और मैं कमजोर।
पता है आपको ये सब कहने के लिए कितने सालों से सोच रहा था? जब वो भागना शुरू भी नहीं किया था तब से, आज भी रात के ग्यारह बजे से लिखने की कोशिश कर रहा हूं सुबह के चार बज गए पर सही से कुछ भी लिख नहीं पाया। आप समझ पा रहे हैं आपकी मौजूदगी मेरी जिंदगी में कितनी थी कि पन्ने भी चार न हुए?
अब मैं ये बताना चाहता हूं कि खुद की दुनियां ढूंढते - ढूंढते खुद सीखते सीखते मैं या तो बहुत ज्यादा सीख गया हूं या आप से बिलकुल उल्टा इसलिए आप वो सुख कभी नहीं पाएंगे जो शायद आपको एक बेटा होने के नाते मुझसे अपेक्षित होंगे, मैं अपनी खुशियां ढूंढते ढूंढते बहुत दूर आकर खो गया हूं आप तो मुझे तब भी नहीं पहचान पाए जब आपके सामने गुम सुम मैं आपको मुझे समझने की उम्मीद करता था।
आपकी जिंदगी मैं चहल, पहल जवानी और आपकी जिंदगी का मुझ पर पड़ा असर मुझे आपके बारे मैं सोचने तक के लिए वक्त जाया करने नहीं देता।
पापा आप मेरी कहानी मैं होते हुए भी हो नहीं आपका दुखी होना मेरे दुखों पर, आपका सोचना मेरे लिए आपका रोना मेरे लिए मायने नहीं रखता आपने कुछ किया नहीं ऐसा भी नहीं पर वो जो करना बाप का करना होता है वो कभी हो नहीं पाया।
मैंने आपके घर के साथ साथ अपने हिस्से में आ सकने वाली जमीन, घर और जो भी कुछ बनता था सब छोड़ा था और मैं कभी न वो वापस लेने आऊंगा और न मैं खुद आऊंगा, जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तो आप जवान थे और आपने वही चुना।
आपको मेरी सबसे ज्यादा जरूरत तो नहीं क्योंकि आपके पापा मेरे पापा से बहुत अच्छे थे जो मरने के बाद भी इतना छोड़ कर गए कि आप को अभी तक जिंदगी मैं मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ी है पर मेरे पापा उतने अच्छे नहीं थे उन्होंने न मुझे खुद से अलग कर दिया बल्कि मेरी जिंदगी में कोई हिस्सेदारी ही नहीं दी न मेरी लाइफ की बैड बुक में आप हो और न गुड बुक में।
आप खुश रहिए मैं बहुत भाग लिया अब मैं मन की शांति के लिए तड़प रहा हूं, अपने असली सपनों के लिए भागना शुरू करना चाहता हूं। बस आप अब मुझसे उम्मीद न लगाएं अब मैं मुड़कर देखना नहीं चाहता मेरे अंदर से ही जब आपके लिए कोई फीलिंग्स नहीं आतीं तो गैरों को दिखाने के लिए क्यों कुछ करूं और मैंने जिंदगी के पाठ अपने आप अपने हिसाब से पढ़े हैं और अब मैं आप से बहुत बदल गया हूं।
मैं अच्छा बुरा नहीं जानता बस मैं और आपके बारे में सोचना नहीं चाहता। राा
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