तू उस पार रहती है मैं इस पार रहता हूं।
तू उस पार रहती है, मैं इस पार रहता हूं।
तू पंखुड़ी गुलाब सी है, मैं तेरी प्यास में प्यासे भंवरे सा हूं।
तू हंसे तो मन्हूसियत भी खिलखिला उठती है,
मैं हंसदुं तो खुद में मजाक जैसा हुं।
तू उस पार रहती है, मैं इस पार रहता हूं।
वक्त के थपेड़ों से भरभराया सा में,
एक कलाकार की तराशी हुई सी हुस्न कि प्रतिमा है तू।
तू उजालों में मस्त में अंधेरों में मगन रहता हूं।
तू उस पार रहती है, मैं इस पार रहता हूं।
सुबह, दिन और शाम में यही सोचता हूं।
कभी तो ज्वार आयेगा इस नदी में और तू बह चली आएगी मेरे आगोश में।
तू भी अपनी आंखें बंद करले और में भी ना रहूं होश में ।
उस पार मेरा आना जाना हो जाए इस पार तेरी खुशबू महके। और ये तोमर मुस्कुराके के बोले
उस पार मेरी बस्ती है। इस पार तेरा ठिकाना है।।
तू उस पार रहती है, मैं इस पार रहता हूं।
हमारे मिलन का चर्चा कुछ यूं करें लोग,
तू तरकारी में हल्के नमक सी है और में हरे धनिए की खुशबू सा हूं।
तू मिठास सी। में हल्का सा चटकरा हूं।।
ना तेरे वजूद की खबर, ना तेरे नाम जनता हुं।
बस ये एक एहसास है, इस एहसास को में खुदा का फरमान मानता हुं।
गर रुखसत कर दिया है दुनियां ने मुझको तो रुखसती ही सही
मैं तो सिर्फ तुझे मिलाकर ही मुक्कमल जहां मानता हूं।
तू उस पार रहती है, मैं इस पार रहता हूं।
तू पंखुड़ी गुलाब सी है, मैं तेरी प्यास में प्यासे भंवरे सा हूं।
Praveen Tomar
(praveen.tomar.singh@gmail.com)
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