Short poetry for WhatsApp status by Praveen Thakur
To watch poetry videos please subscribe to my YouTube channel Click here
मेरी जमीं मेरा अम्बर,
क्या पैगम्बर भी बांट लोगे तुम।
हर बार उलझन में आकर लौट आता हूं,
क्या बिना मेरी बारी आये ही मेरा नंबर काट दोगे तुम?
अजीब सा मसलसल मसला है तरन्नम ए हयात का।
दिल, जिगर और धड़कन हर जगह कब्जा है आपका,
हवाओं को भी रास आने दीजिए हुज़ूर,
अब क्या सांसें भी थाम दोगे तुम?
~प्रवीन ठाकुर
Apne apko roj tarasha jis safer e anjam ki aivaj me,
Uske ane ki ahat see hi tut Gaya me
~Praveen Thakur
Hawa ki lahar bankar tu Meri khidki na khatkhata,
Me band kamre me toofan samete baitha hun
~Praveen Thakur
वो बेरहम नींद उड़ाके कहता है
आराम फरमाइए
ख्वाबों में दीदार होगा
~Praveen Thakur
मेरी उम्र और मेरी हरकतों में फ़र्क है थोड़ा,
जहां तुम अनमने से होकर हार जाते हो,
उसी तरफ दौड़ जाता हूं मैं।
ख़ामोश रहकर भी बहुत कुछ बोल जाता हूं मैं
~ प्रवीन ठाकुर
किसी रोज ख्वाब देखा था तेरा कि तू मेरा हो,
आहिस्ते आहिस्ते तेरे दर का रास्ता बनाता गया।
आज मेरा और तेरा दर एक ही है,
मुमकिन है कि शाकेबा का फल इससे बेहतर मेरा हो?
~ प्रवीन ठाकुर
मेरी जमीं मेरा अम्बर,
क्या पैगम्बर भी बांट लोगे तुम।
हर बार उलझन में आकर लौट आता हूं,
क्या बिना मेरी बारी आये ही मेरा नंबर काट दोगे तुम?
अजीब सा मसलसल मसला है तरन्नम ए हयात का।
दिल, जिगर और धड़कन हर जगह कब्जा है आपका,
हवाओं को भी रास आने दीजिए हुज़ूर,
अब क्या सांसें भी थाम दोगे तुम?
~प्रवीन ठाकुर
Apne apko roj tarasha jis safer e anjam ki aivaj me,
Uske ane ki ahat see hi tut Gaya me
~Praveen Thakur
Hawa ki lahar bankar tu Meri khidki na khatkhata,
Me band kamre me toofan samete baitha hun
~Praveen Thakur
वो बेरहम नींद उड़ाके कहता है
आराम फरमाइए
ख्वाबों में दीदार होगा
~ प्रवीन ठाकुर
Usko mangna tha mujhe me qafir tha
Sajda n karta to Kya karta.
~Praveen Thakur
मेरी उम्र और मेरी हरकतों में फ़र्क है थोड़ा,
जहां तुम अनमने से होकर हार जाते हो,
उसी तरफ दौड़ जाता हूं मैं।
ख़ामोश रहकर भी बहुत कुछ बोल जाता हूं मैं
~ प्रवीन ठाकुर
किसी रोज ख्वाब देखा था तेरा कि तू मेरा हो,
आहिस्ते आहिस्ते तेरे दर का रास्ता बनाता गया।
आज मेरा और तेरा दर एक ही है,
मुमकिन है कि शाकेबा का फल इससे बेहतर मेरा हो?
~ प्रवीन ठाकुर
Comments
Post a Comment