मेरे फेवरेट युवा नेता राहुल जी।
मेरे फेवरेट युवा नेता राहुल जी।
यूं तो राजनीति ने सदैव ही इस पावनभूमी को गर्त में ठेलने का कार्य किया है, परन्तु देवाधिदेव महादेव की असीम अनुकम्पा से इस धरती पर एक बहुत ही सभ्य, विचारशील और विवेकपूर्ण युवा ने जन्म लिया है इन्होंने जन्म के पश्चात कुछ शब्दों में ही सिद्ध कर दिया था कि यह कोई आम युवा नहीं बल्कि जो गीत है (मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती) इस गीत के जीवंत उदाहरण बनके उभरे जब उन्होंने अपनी असीमित शक्तियों द्वारा कहा कि वो आलू डालकर सोना निकाल सकते हैं।
कहां डालकर और कहां से निकालेंगे उस स्थान को आपके विचार के लिए रिक्त छोड़ता हूं परन्तु ये साफ करना भी आवश्यक है कि हर पीली चीज सोना नहीं होती कुछ तत्ति भी होती है और यदि राहुल जी द्वारा दिए गए २४ कैरट सोने में आपको गंध आए तो विस्मयादीबोधक चिन्ह न लगा दीजिएगा।
ये इतने कौशलेंद्र हैं कि राम के टूनीर में जितने बाण नहीं थे, उतने इनके कौशल हैं हां कभी कभी शब्दों कि समझ में ये कमजोर पड़ जाते हैं जैसे बलात्कार और भ्रष्टाचार में इनको भेद नहीं पता पर सच ये भी है कि अंग्रेजी पढ़े लिखे युवा की परख हिंदी में नहीं की जा सकती।
इन्हें देश विदेश के संघर्ष करने वालों का विशेष सम्मान करने के लिए भी जाना जाता है किस प्रकार इन्होंने विश्व में बताया कि पिप्सी का मालिक शिकंजी बेचा करता था, आपको उस बात का बोध भी नहीं होगा उस दिन पीप्सी का मालिक आंखों में नींबू निचोड़कर रोया था।
जो कहावत है लड़ न सको पर लड़ने का डर हमेशा दुश्मन को दिखाते रहो और ऐसी कुशल रणनीतियां इन्हें भाली भांति आती हैं किस प्रकार मनरेगा न कह पाने पर बड़ी ही कुशलता से उसे नारेगा कर देते हैं ये अकल्पनीय है।
कुल मिलाकर के अर्थ शास्त्रियों का भी कहना है कि राहुल जी उनके लिए भी एक पहेली बने हुए हैं जिस प्रकार का संख्या ज्ञान इनको है उतना तो कौटिल्य को भी नहीं था ढाई को साढ़े दो या साढ़े ढाई भी कहा जा सकता है ये महत्वपूर्ण खोज इन्होंने की और यदि नंबर बड़ा हो तो उसे याद करना आवश्यक नहीं किस प्रकार अपनी हर रैली में ये ५ हजार करोड़ को २५ करते हैं या २-३-४-४-५ किसी भी संख्या से परिवर्तन कर देते हैं ये दिल जीतने वाला कृत्य है, इस महान व आधुनिक युग के तारणहार के लिए एक लेख में सबकुछ समेटना तो असंभव है और इसीलिए में भी इनके बहुत बड़े बुद्धि भाग से कुछ आधा पौना किलोमीटर नाप कर छोड़ देता हूं।
जयकारा इटली वाली मैया का।
मेरा पहला लेख युवा, महत्वाकांक्षी एवं संघर्षशील युवा राहुल गांधी जी के लिए।
प्रवीन ठाकुर ( ओरिजिनल लिखा है कॉपी पेस्ट में क्रेडिट देना न भूलें)
यूं तो राजनीति ने सदैव ही इस पावनभूमी को गर्त में ठेलने का कार्य किया है, परन्तु देवाधिदेव महादेव की असीम अनुकम्पा से इस धरती पर एक बहुत ही सभ्य, विचारशील और विवेकपूर्ण युवा ने जन्म लिया है इन्होंने जन्म के पश्चात कुछ शब्दों में ही सिद्ध कर दिया था कि यह कोई आम युवा नहीं बल्कि जो गीत है (मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती) इस गीत के जीवंत उदाहरण बनके उभरे जब उन्होंने अपनी असीमित शक्तियों द्वारा कहा कि वो आलू डालकर सोना निकाल सकते हैं।
कहां डालकर और कहां से निकालेंगे उस स्थान को आपके विचार के लिए रिक्त छोड़ता हूं परन्तु ये साफ करना भी आवश्यक है कि हर पीली चीज सोना नहीं होती कुछ तत्ति भी होती है और यदि राहुल जी द्वारा दिए गए २४ कैरट सोने में आपको गंध आए तो विस्मयादीबोधक चिन्ह न लगा दीजिएगा।
ये इतने कौशलेंद्र हैं कि राम के टूनीर में जितने बाण नहीं थे, उतने इनके कौशल हैं हां कभी कभी शब्दों कि समझ में ये कमजोर पड़ जाते हैं जैसे बलात्कार और भ्रष्टाचार में इनको भेद नहीं पता पर सच ये भी है कि अंग्रेजी पढ़े लिखे युवा की परख हिंदी में नहीं की जा सकती।
इन्हें देश विदेश के संघर्ष करने वालों का विशेष सम्मान करने के लिए भी जाना जाता है किस प्रकार इन्होंने विश्व में बताया कि पिप्सी का मालिक शिकंजी बेचा करता था, आपको उस बात का बोध भी नहीं होगा उस दिन पीप्सी का मालिक आंखों में नींबू निचोड़कर रोया था।
जो कहावत है लड़ न सको पर लड़ने का डर हमेशा दुश्मन को दिखाते रहो और ऐसी कुशल रणनीतियां इन्हें भाली भांति आती हैं किस प्रकार मनरेगा न कह पाने पर बड़ी ही कुशलता से उसे नारेगा कर देते हैं ये अकल्पनीय है।
कुल मिलाकर के अर्थ शास्त्रियों का भी कहना है कि राहुल जी उनके लिए भी एक पहेली बने हुए हैं जिस प्रकार का संख्या ज्ञान इनको है उतना तो कौटिल्य को भी नहीं था ढाई को साढ़े दो या साढ़े ढाई भी कहा जा सकता है ये महत्वपूर्ण खोज इन्होंने की और यदि नंबर बड़ा हो तो उसे याद करना आवश्यक नहीं किस प्रकार अपनी हर रैली में ये ५ हजार करोड़ को २५ करते हैं या २-३-४-४-५ किसी भी संख्या से परिवर्तन कर देते हैं ये दिल जीतने वाला कृत्य है, इस महान व आधुनिक युग के तारणहार के लिए एक लेख में सबकुछ समेटना तो असंभव है और इसीलिए में भी इनके बहुत बड़े बुद्धि भाग से कुछ आधा पौना किलोमीटर नाप कर छोड़ देता हूं।
जयकारा इटली वाली मैया का।
मेरा पहला लेख युवा, महत्वाकांक्षी एवं संघर्षशील युवा राहुल गांधी जी के लिए।
प्रवीन ठाकुर ( ओरिजिनल लिखा है कॉपी पेस्ट में क्रेडिट देना न भूलें)
अति सुंदर । 🚩
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