कभी - कभी का लिखना
बारह बजकर बीस मिनट हो रहे हैं, और आप कहें तो सेकंड्स भी बता दूं। समय के व्यर्थ होने का दुख मुझे सबसे अधिक चुभता है पर विकर्षण की इस दुनियां मैं सबसे ज्यादा मूल्य किसी का गिरा है तो वो समय का ही है। हिंदी मैं कहूं तो हमारी जिंदगी मैं डिस्ट्रैक्शन इतना है कि एक हल्का सा नोटिफिकेशन हमारे दिन का बड़ा हिस्सा खा जाता है, और दिन के अंत मैं हमने कुछ भी ऐसा नहीं किया जिसे समय के सदुपयोग मैं गिनाया जा सके, क्या मिल गया अगर मेरी फोटो दस पंद्रह लोगों ने देखली तो? अगर मुझे न पता हो आजकल की इंटरनेट की नई वाइरल सेंसेशन कौन है तो कौनसा मेरी जिंदगी के अहम काम रुक जाएंगे? पर अगर मैं थोड़ा सा अनुशासित होकर उस समय को प्रयास, अभ्यास और कर्म से जड़ देता तो शायद एक बड़े अहम काम को अपने जीवन में साध सकता था।
ऊपर इंटरनेट को लेकर ज्ञान इसलिए दिया है कि मुझे पूरा एक महीना होने वाला है अपने गांव से २३०० किलोमीटर दूर रहते हुए, एक ऐसी जगह जहां मुझे कोई नहीं जानता, जहां मैं किसी को नहीं जानता। जहां चारों तरफ हरियाली है जहां रोज सुबह चिड़ियों की आवाज मेरे कानों में रस घोलती है, जहां शांति है, जहां ताजगी है और जहां मेरा चित्त प्रसन्न है पर फिर भी लिखने का नियमित पालन नहीं कर पा रहा।
केरल के किसी हिस्से के किसी मकान के तीसरे मंजिले के कमरे में, मैं खिड़की के सहारे बाहर की हरियाली रात के अंधेरे मैं कितनी हैवान लगती है ये देख रहा हूं।
सूरज की हल्की सी छनती किरणों में पेड़ पौधों से भरे रास्तों से निकलना एक हसीन सपने जैसा लगता है पर अगर सोचो रात के अंधेरे मैं आपको उन्हीं चारों तरफ पेड़ों से भरे रास्तों से चलना पड़े तो कैसा लगेगा? जहीन को जाहिल और हसीन को हैवान देखने के लिए बस समय और दृष्टि का ही तो फर्क है। जो दिन मैं सुकून देता है वो रात को दिल हिला सकता है, जो सबसे जहीन दिखता हो सबसे जाहिल हरकत भी कर सकता है।
आज बहुत दिनों बाद खुद को अनुशासित करके लिखने बैठा हूं, कीबोर्ड और कलम के बीच द्वंद रहता है पर मैं कलम से अंधेरे मैं नहीं लिख सकता और मुझे अंधेरा पसंद है इसलिए कीबोर्ड हर बार जीत जाता है। कीबोर्ड से लिखने का मतलब है कि गन्ने पर गान्ड के सहारे बैठना, गलती से भी नेट खुल गया या लिखने से विराम लिया तो विकर्षण की एक पूरी दुनियां आपको घेर लेगी।
व्हाटसएप से लेकर वेब और वेब से लेकर डार्क वेब की इतनी विराट दुनियां है कि अगर आपके पास व्यर्थ करने के लिए हैं तो आप सैकड़ों जीवन अपने व्यर्थ करके आ सकते हैं फिर भी हाथ मैं गाजर ही आएगी।
मैं अपनी उम्र के उस पड़ाव पर हूं जहां थोड़ा सा अनुशासन मुझे तीस मार खान बना सकता है और सच कहूं तो इस बात को मैं भली भांति जानता हूं कि मुझे मेरे जीवन का सफल निर्वाहन करने के लिए शांत चित्त की आवश्यकता है। लड़कपन जैसी एक जिद है कि जितने काम, व्यवसाय और कलाकरियां हैं सब इस जीवन मैं करना चाहता हूं, हर करतब दिखाकर हर किसी की तालियां लूटना चाहता हूं पर पिछले कुछ दिनों मैं समझ आया है कि ये चाहत बचकानी और फालतू है। सफ़र करते वक्त भी दायां या फिर बाएं एक ओर ही देखा जा सकता है एक तरफ के नजारों को नजरों में भर भी लूं फिर भी शायद क्या पता दूसरी ओर के नजारे और भी बेहतर हों जिन्हें मैं देख ही नहीं पाया। इसलिए अब लगता है कि हर खेल का बंदर बनने से अच्छा है किसी एक खेल को अपना पक्का मैदान कर ही लूं।
बहुत सी चीजें कर पाना कूल तो लगता है पर अपनी सारी दार्शनिक शक्ति का प्रयोग करके इतना समझ आ गया है कि एक काम सबसे बेहतर कर पाना बेहतर है बजाय हजार काम ठेलने की कोशिश करने के।
पिछले वर्ष कितनी उठा पटक रही थी जीवन मैं, खुलेआम सन्यासी होने की इच्छा जाहिर करने से लेकर सीधा गोवा मैं सुबह पांच बजे तक समंदर किनारे दारू पीने का सफ़र हो या एक छोटे से कमरे मैं रहने वाले एक अनजान लड़के का लाखों लोगों के मन को जीत कर उन्हें अपना बना कर वहां से उन्हीं पांव अकेलेपन के अंधेरों में लौट आना। अपने अनपढ़ रिश्तेदारों से "ये लड़का तो चूतिया सा है" सुनने से लेकर दिल्ली की सियासत के बड़े बड़े नेताओं के बोलों के शब्द बनना और "प्रवीन जी लिखते तो एकदम कलेजा भर के हैं" तक, परीक्षा मैं प्रश्न को ही तीन चार बार लिख डालना ताकि कॉपी भरी लगे से लेकर खुद की किताब छाप डालना तक! पिछले साल से इस साल में मैं कुछ नहीं ला पाया हूं न सियासी रुतबा, न लोगों के दिमाग पर छाने वाला जलवा, न किसी से पहली मुलाकात पर मिली डायरी और न मुलाकात करने वाली। सब उसी साल मैं छूट गया। न किसी का बैर, न ईर्ष्या और न किसी का प्यार, साथ और न वादा। सब कुछ छोड़ आया हूं बस सीख और अनुभव को कंधों पर लादे हूं अभी तक।
क्या मचाऊ साल था ये मेरे लिए पर ये साल उस साल की तुलना में अभी तक उससे भी बेहतर जा रहा है, भगवान के अपने देश मैं तपस्या करने का अवसर मिला है, खुद को तराशने का, निखारने का और उभारने का अवसर मिला है, ऐसा लगता है कि गोविंद ने मुझे इच्छा पूर्ति का वरदान दे रखा है पर साथ ही साथ टर्म्स एंड कंडीशंस अप्लाई वाला अस्टरिस्क चिन्ह भी लगा रखा है।
जो भी चाहूं मिल जाता है पर उसे किसी के साथ साझा नहीं कर सकता। अब एक बजकर छब्बीस मिनट हो गए हैं और फोन की लाइट के अलावा बाकी सब अंधेरा है,
क्यूंकि अंधेरा पसंद है मुझे।
Nice yr it's really gud accha lga padh ke first wrote hai jo maine concentrate krke pdha hai seriously accha lga
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ReplyDeleteबहूत शानदार 👏
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