सड़क का बेकार पत्थर।

 पास रहकर, आंखों में देखकर, शरीर को छूकर और वो सब करके जो दुनियां करवाना चाहती है तो भी सुकून न मिले तो याद रखना मेरे कंधे तैयार हैं तुम्हारे आंसू सोखने के लिए। मैं तुम्हें कभी रोने न देने का वादा नहीं करूंगा क्योंकि मैंने रोने में जो सुख देखा है, जो शांति महसूस की है, जो शुद्ध हो जाना, जाना है, मैं नहीं चाहता उस सुंदरता को तुम जी न पाओ।


दुनियां की फरमाइशें और मन की ख्वाहिशें दोनों में से एक पूरा होगा, मुझे तुम पूरा कर दो तुम्हें में अपने आप से भर दूंगा। 


मैं एक सड़क पर पड़े हुए बेकार पत्थर सा हूं, तुम मुझे उठा ले जाओ और रख दो अपने घर के मंदिर में मेरे सर पर अपने प्रेम की लाल चुन्नी उड़ाकर। अपने होठों की लाली से चूमकर ठीक मस्तिष्क पर बना देना एक लाल निशान।


तुम्हारे बस इतने से साथ से मैं दुनियां के लिए पूजनीय हो जाऊंगा। और मेरी सारी पूजा अर्पण होगी तुम्हारे प्रेम के उस सागर में जिसने मुझे सड़क पर पड़ती ठोकरों से बचाकर मानवों की श्रद्धा में बिठा दिया।


लेखक - प्रवीन ठाकुर




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